कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ *सफलता की कहानी* *आधुनिक सूकरपालन से स्वरोजगार: 400 से अधिक सूकरों के साथ ग्रेसी ने लिखी सफलता की नई इबारत* *बीएससी एग्रीकल्चर ग्रेजुएट युवती ने सरकारी सहायता से स्वरोजगार को बनाया सफलता की मिसाल* *नेशनल लाइव स्टॉक मिशन से मिली 30 लाख रुपये की सब्सिडी, आधुनिक फार्म में 400 से अधिक सूकर* धनंजय राठौर संयुक्त संचालक, जनसंपर्क संचालनालय, रायुपर रायपुर, / सूकर पालन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में एक तेजी से उभरता हुआ और अत्यधिक लाभदायक स्वरोजगार है। कम लागत, उच्च प्रजनन क्षमता और मांस की लगातार बढ़ती मांग के कारण, यह लाखों युवाओं और किसानों के लिए स्थायी आय का एक प्रमुख साधन बन गया है। सूअर अन्य पशुओं की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ते हैं। मादा सूअर एक बार में 8 से 12 बच्चों (पिगलेट्स) को जन्म देती है, जो 45 से 60 दिनों में बेचने लायक हो जाते हैं। छत्तीसगढ़ में कई युवा अपनी पारंपरिक या सामान्य नौकरियां छोड़कर आधुनिक तरीके से सूकर पालन कर सालाना लाखों-करोड़ों रुपये कमा रहे हैं। बस्तर के युवाओं में अब पारंपरिक रोजगार से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि एवं पशुपालन आधारित उद्यमों की नई सोच विकसित हो रही है। इसी सोच को साकार करते हुए बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के किंजोली गांव की रहने वाली बीएससी एग्रीकल्चर स्नातक ग्रेसी दुग्गा ने पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग से एक करोड़ रुपये से अधिक लागत की आधुनिक सूकरपालन परियोजना स्थापित कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। आज उनका फार्म न केवल सफल व्यावसायिक मॉडल बन चुका है, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र भी बन गया है। *नौकरी के बजाय स्वरोजगार का चुना रास्ता* ग्रेसी दुग्गा ने वर्ष 2023 में उत्तराखंड के देहरादून से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ने के बजाय उन्होंने व्यावहारिक ज्ञान का उपयोग करते हुए कृषि एवं पशुपालन के क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने का निर्णय लिया। उन्होंने पारंपरिक व्यवसायों के बजाय सूकरपालन को चुना, क्योंकि बस्तर क्षेत्र में इसकी मांग लगातार बढ़ रही थी, जबकि व्यावसायिक स्तर पर इस क्षेत्र में बहुत कम लोग कार्य कर रहे थे। भारत सरकार सूकर पालन को बढ़ावा देने के लिए नेशनल लाइवस्टॉक मिशन जैसी योजनाएं चला रही है। इसके तहत, फार्म खोलने के लिए 15 लाख से 30 लाख तक की परियोजना पर 50% तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है। *एक करोड़ बारह लाख रुपए की परियोजना को मिला सरकारी सहयोग* बड़े स्तर पर आधुनिक सूकरपालन इकाई स्थापित करने के लिए ग्रेसी को तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता की आवश्यकता थी। पशु चिकित्सा सेवाओं के संयुक्त संचालक कार्यालय ने उन्हें परियोजना तैयार करने से लेकर विभिन्न तकनीकी पहलुओं तक हर स्तर पर सहयोग प्रदान किया। विभाग के मार्गदर्शन में 1 करोड़ 12 लाख 10 हजार रूपए की आधुनिक परियोजना तैयार की गई, जिसे केंद्र सरकार की नेशनल लाइव स्टॉक मिशन योजना के अंतर्गत स्वीकृति मिली। अनुसूचित जनजाति वर्ग से पहली बार आवेदन करने पर ग्रेसी को योजना के तहत 30 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई। ग्रेसी का कहना है कि यदि यह सरकारी अनुदान नहीं मिलता तो वे केवल 20 से 25 सूकरों के साथ छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू कर पातीं, लेकिन शासन की सहायता ने उन्हें आधुनिक अधोसंरचना के साथ बड़े स्तर पर फार्म स्थापित करने का अवसर दिया। *आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन से मिली सफलता* पशुपालन विभाग के चिकित्सकों और कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में फार्म में तमिलनाडु से उन्नत नस्ल के सूकर लाए गए। सभी पशुओं के टीकाकरण, पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया। मई 2025 में फार्म की शुरुआत 110 प्रजनन योग्य सूकरों से हुई थी, जिनमें 100 मादा और 10 नर शामिल थे। शुरुआती चरण में छोटे बच्चों को तैयार करने और प्रजनन योग्य बनाने में लगभग एक वर्ष का समय लगा। वैज्ञानिक प्रबंधन और बेहतर देखभाल के परिणामस्वरूप जून 2026 तक फार्म में 202 वयस्क प्रजनन योग्य सूकर तथा लगभग 206 पिगलेट तैयार हो चुके हैं। वर्तमान में फार्म में कुल 400 से अधिक सूकर मौजूद हैं, जो इस परियोजना की उल्लेखनीय सफलता को दर्शाते हैं। *पहली बिक्री में ही लगभग चार लाख रुपये की आय* ग्रेसी दुग्गा के आधुनिक फार्म से अब उन्नत नस्ल के पिगलेट्स की व्यावसायिक बिक्री भी शुरू हो चुकी है। उनके फार्म से रायपुर सहित स्थानीय बाजारों में सूकरों की नियमित आपूर्ति की जा रही है। हाल ही में उन्होंने 65 पिगलेट्स को 6 हजार रूपए प्रति पिगलेट की दर से बेचकर 3 लाख 90 हजार रुपए की आय अर्जित की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर सूकरपालन लाभकारी व्यवसाय के रूप में तेजी से उभर रहा है। *बस्तर के युवाओं के लिए बनी प्रेरणा* ग्रेसी दुग्गा की सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि युवाओं को सही मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और समय पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिले तो वे ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर सफल उद्यम स्थापित कर सकते हैं। पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग, शासन की वित्तीय सहायता और अपनी मेहनत के बल पर ग्रेसी ने न केवल स्वयं को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि बस्तर के शिक्षित युवाओं को कृषि एवं पशुपालन आधारित स्टार्टअप शुरू करने के लिए भी नई प्रेरणा दी है। Spread the love Post navigation पंडरिया की बड़ी उपलब्धि: विधायक भावना बोहरा की ‘लक्ष्य निःशुल्क कोचिंग’ के 7 विद्यार्थियों ने NEET परीक्षा में मारी बाजी** कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट पंडरिया। पंडरिया विधानसभा में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम हुई है। विधायक श्रीमती भावना बोहरा द्वारा संचालित ‘लक्ष्य निःशुल्क कोचिंग सेंटर’ के 7 विद्यार्थियों ने NEET परीक्षा में सफलता हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। सफल विद्यार्थियों में वेदांत कुमार साहू, राहुल मरकाम, यामिनी देवांगन, दुजराम मरकाम, उमा भोई, सोमी चंद्राकर एवं लक्ष्मण शामिल हैं। इन विद्यार्थियों ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी मेहनत और निःशुल्क कोचिंग के मार्गदर्शन से मेडिकल क्षेत्र में प्रवेश का सपना साकार किया। ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर अवसर देने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘लक्ष्य निःशुल्क कोचिंग’ आज अनेक युवाओं के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी है। यहां NEET, IIT-JEE एवं CGPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा पूरी तरह निःशुल्क कराई जाती है। इस अवसर पर विधायक भावना बोहरा ने सभी सफल विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह केवल सात विद्यार्थियों की सफलता नहीं, बल्कि पूरे पंडरिया विधानसभा के सपनों और विश्वास की जीत है। उन्होंने कहा कि “प्रतिभा गांवों में भी भरपूर है, जरूरत केवल सही अवसर और उचित मार्गदर्शन की होती है।” उन्होंने यह भी बताया कि छात्राओं के लिए निःशुल्क बस सेवा, ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ तथा अन्य शैक्षणिक पहलें इसी उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं ताकि आर्थिक अभाव किसी भी विद्यार्थी के भविष्य में बाधा न बने। कबीर क्रांति परिवार की ओर से सभी सफल विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों एवं शिक्षकों को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं। कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ *विशेष लेख* *सीड बॉल अभियान- हरियाली बढ़ाने का सरल और प्रभावी माध्यम* *जनभागीदारी से साकार हो रहा हरित छत्तीसगढ़ का संकल्प* धनंजय राठौर संयुक्त संचालक अशोक कुमार चंद्रवंशी सहायक जनसंपर्क अधिकारी