स्वतंत्रता सेनानी स्व हजारी लाल जैन बाल्यावस्था में ही अंग्रेज के खिलाफ आवाज बुलंद पर जेल गये। स्व हजारी जैन महात्मा गांधी के कार चालक बने ** कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

स्वतंत्रता सेनानी स्व हजारी लाल जैन बाल्यावस्था में ही अंग्रेज के खिलाफ आवाज बुलंद पर जेल गये। स्व हजारी जैन महात्मा गांधी के कार चालक बने **
कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट
माह जून के प्रथम रविवार को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संस्था के राष्ट्रीय महासचिव श्री जितेंद्र रघुवंशी कनखल हरिद्वार वाले के मार्गनिर्देशन में श्रद्धांजलि कार्यक्रम स्थानीय भारत माता चौक कवर्धा में आयोजित किया गया था। भारत माता एवम् वीर शहीद तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को गुलाल पुष्प अर्पित कर दीपदान किया गया। डा नरेश कुमार यदु अध्यक्ष स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संस्था कबीरधाम ने बताया कि यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम कबीरधाम जिला में 7 वा कार्यक्रम है और आज के दिन पूरे भारत देश के 22 राज्यों के विभिन्न जिलों में आयोजित किये जाते हैं। तत्पश्चात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संस्था कबीरधाम जिले के उपाध्यक्ष इंजी एस एस जैन ने कार्यक्रम को उद्बोधन करते हुए अपने पिताश्री स्व हजारी लाल जैन स्वतंत्रता सेनानी को नमन करते हुए कहा कि हजारी लाल जैन का जन्म 10 जनवरी 1910 को जगदलपुर बस्तर में हुआ था। वे बचपन से ही देश की आजादी के बारे में सोचते थे इसी विचार में बाल्यावस्था 12 वर्ष की उम्र में ही अंग्रेजो के खिलाफ नारे लगाए गए उस समय बोलने की आजादी गुलाम भारत में अंग्रेजों के खिलाफ नहीं था आप शासन के विरोध में बात नहीं कर सकते थे,तब बालक हजारी लाल जैन को अंग्रेज ने पकड़कर जेल में डाल दिया गया चूंकि बालक होने की वजह से जुर्माना लगा कर छोड़ दिया गया। उसके उपरांत वे डरे नहीं और अंग्रेजों के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहे। इंजी एस एस जैन के अनुसार एक बार अंग्रेजो ने हजारी लाल को उल्टा लटकाकर पानी के हौज़ में डुबोते थे इस पर वे साहस का परिचय देते हुए बेहोशी का नाटक किया अंग्रेजो ने उसे बेहोश समझकर पैर में बांधे हुए रस्सा को खोला तो तत्काल हजारी लाल ने फुर्ती दिखाते हुए तत्काल वंहा से भागा और अंग्रेज पकड़ नहीं पाए। अपनी पिताश्री की स्मृति को याद करते हुए इंजी एस एस जैन के आंखों में आंसू आ गया। 1933 सन का जिक्र करते हुए इंजी एस एस जैन ने बताया कि महात्मा गांधी बिलासपुर से रायपुर पं रविशंकर शुक्ल के निवास रुके थे वहां से धमतरी एक असहयोग आंदोलन में शरीक होने आये थे वो कंडेल असहयोग आंदोलन था मेरे पिताजी महात्मा गांधी के कार को चलाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ महात्मा गांधी के निज सचिव तत्कालीन श्री देसाई ने ही हजारी लाल जैन को कार ड्राइव करने कहा था मात्र 23 वर्ष की उम्र में महात्मा गांधी को कार से धमतरी कुरुद खरोरा पलारी बलौदाबाजार भाटापारा होते बिलासपुर रेलवे स्टेशन तक कार ड्राइव किया। ये मेरे लिए गर्व की बात है। उस कार में महात्मा गांधी के अलावा निज सचिव श्री देसाई जी, मीरा बेन , बप्पा ठाकरे थे। इंजी एस एस जैन ने और कई अपने पिताश्री स्व हजारी लाल जैन के बारे में जानकारी दी उन्होंने बताया कि मेरे पिताजी कुल मिलाकर 6 महीने तक जेल में रहे।
इस स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व हजारी लाल जैन के बारे मे जानकारी देने पर संस्था में एक नया ऊर्जा का संचार हुआ एवं डा नरेश कुमार यदु अध्यक्ष स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संस्था कबीरधाम ने संस्था की तरफ से हार्दिक धन्यवाद दिया।
अंत में वंदे मातरम राष्ट्र गीत बाद राष्ट्र गान जन मन अधिनायक जय हे…… के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में अध्यक्ष डॉ नरेश कुमार यदु सहित एस एस जैन उपाध्यक्ष नरोत्तम महोबिया सचिव गुरुप्रसाद शर्मा भंवर लाल लूनिया, सहसचिव सियाराम महोबिया उपस्थित थे।
उक्त जानकारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संस्था कबीरधाम जिला के अध्यक्ष डॉ नरेश कुमार यदु ने दी।



