कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट — सोशल मीडिया पर वायरल होने वाला दमदार संस्करण: सड़क के लिए जंगल की बलि! वन परिक्षेत्र पश्चिम पंडरिया में सैकड़ों पेड़ों की कटाई से मचा बवाल कुकदूर/अमनिया — जनमन योजना के तहत सड़क निर्माण कार्य अब गंभीर विवादों में घिर गया है। ग्राम पंचायत अमनिया के आश्रित ग्राम टेढ़ापानी और डेगूरजाम तक बनाई जा रही सड़क पर पर्यावरण विनाश और नियमों की अनदेखी के आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि विकास के नाम पर जंगलों का सीना चीरकर सैकड़ों बहुमूल्य पेड़ों की बलि दी जा रही है। आरोप है कि 3 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए निर्धारित 6 मीटर चौड़ाई की बजाय 10 से 15 मीटर तक जंगल साफ किया गया। सरई, महुआ, तेंदू, चार, कुसुम और सेन्हा जैसे कीमती पेड़ों को काट दिया गया। कई विशाल सरई वृक्ष जड़ सहित उखाड़ दिए गए, तो कुछ मिट्टी में दब गए। कटे पेड़ों को आरा मशीन से हटाने का भी आरोप। ग्रामीणों ने वन विभाग और ठेकेदार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि जिन पर जंगल बचाने की जिम्मेदारी है, वही जंगल उजड़ने दे रहे हैं। निर्माण कार्य के दौरान 3 बिजली खंभे भी क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे ग्रामीणों में बिजली व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। एक तरफ सरकार वृक्षारोपण अभियान चला रही है, दूसरी ओर जंगलों में सैकड़ों पेड़ों की कटाई से पर्यावरण संरक्षण के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बड़ा आरोप यह भी — सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली मुरुम, गिट्टी और रेत जंगल क्षेत्र से ही निकाली जा रही है ताकि रॉयल्टी बचाई जा सके। ग्रामीणों की मांग — पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो दोषी अधिकारियों और ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई हो जंगलों की अंधाधुंध कटाई पर तुरंत रोक लगे ? बड़ा सवाल ? क्या सड़क निर्माण के नाम पर जंगल उजाड़ने वालों पर कार्रवाई होगी? या फिर सैकड़ों पेड़ों की कटाई का मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

D.N. Yogi

ByD.N. Yogi

Jun 6, 2026

कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट — सोशल मीडिया पर वायरल होने वाला दमदार संस्करण:

सड़क के लिए जंगल की बलि!
वन परिक्षेत्र पश्चिम पंडरिया में सैकड़ों पेड़ों की कटाई से मचा बवाल
कुकदूर/अमनिया — जनमन योजना के तहत सड़क निर्माण कार्य अब गंभीर विवादों में घिर गया है। ग्राम पंचायत अमनिया के आश्रित ग्राम टेढ़ापानी और डेगूरजाम तक बनाई जा रही सड़क पर पर्यावरण विनाश और नियमों की अनदेखी के आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि विकास के नाम पर जंगलों का सीना चीरकर सैकड़ों बहुमूल्य पेड़ों की बलि दी जा रही है।
आरोप है कि 3 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए निर्धारित 6 मीटर चौड़ाई की बजाय 10 से 15 मीटर तक जंगल साफ किया गया।
सरई, महुआ, तेंदू, चार, कुसुम और सेन्हा जैसे कीमती पेड़ों को काट दिया गया।
कई विशाल सरई वृक्ष जड़ सहित उखाड़ दिए गए, तो कुछ मिट्टी में दब गए।
कटे पेड़ों को आरा मशीन से हटाने का भी आरोप।
ग्रामीणों ने वन विभाग और ठेकेदार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि जिन पर जंगल बचाने की जिम्मेदारी है, वही जंगल उजड़ने दे रहे हैं।
निर्माण कार्य के दौरान 3 बिजली खंभे भी क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे ग्रामीणों में बिजली व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है।
एक तरफ सरकार वृक्षारोपण अभियान चला रही है, दूसरी ओर जंगलों में सैकड़ों पेड़ों की कटाई से पर्यावरण संरक्षण के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बड़ा आरोप यह भी — सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली मुरुम, गिट्टी और रेत जंगल क्षेत्र से ही निकाली जा रही है ताकि रॉयल्टी बचाई जा सके।
ग्रामीणों की मांग — पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो
दोषी अधिकारियों और ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई हो
जंगलों की अंधाधुंध कटाई पर तुरंत रोक लगे
? बड़ा सवाल ?
क्या सड़क निर्माण के नाम पर जंगल उजाड़ने वालों पर कार्रवाई होगी?
या फिर सैकड़ों पेड़ों की कटाई का मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
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