कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ | डी.एन. योगी की रिपोर्ट कवर्धा (कबीरधाम) — एक तरफ जिले की सभी 471 ग्राम पंचायतों में 7 तारीख को “चावल महोत्सव” मनाने की तैयारी की जा रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि कई हितग्राहियों को पिछले तीन माह से राशन का चावल नहीं मिला है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों में योजनाओं को सफल दिखाने के लिए झूठी खबरें और विज्ञप्तियां जारी करवा रहे हैं, जबकि हकीकत में गरीब परिवारों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है। मुख्य सवाल खड़े हो रहे हैं: जब तीन महीने का चावल वितरण ही नहीं हुआ, तो महोत्सव किस बात का? क्या अधिकारियों द्वारा आंकड़ों में हेरफेर किया जा रहा है? क्या शासन को गलत जानकारी भेजी जा रही है? ग्रामीणों की मांग: पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए दोषी अधिकारियों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई हो सभी पात्र हितग्राहियों को बकाया राशन तुरंत वितरित किया जाए यह मामला सीधे तौर पर गरीबों के हक और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की पारदर्शिता से जुड़ा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह एक बड़ा प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का संकेत है।  प्रशासन और जिला अधिकारियों को चाहिए कि वे इस मामले पर तुरंत संज्ञान लें, ताकि योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंचे, न कि केवल कागजों तक सीमित रह जाए

D.N. Yogi

ByD.N. Yogi

May 7, 2026

कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ | डी.एन. योगी की रिपोर्ट

कवर्धा (कबीरधाम) — एक तरफ जिले की सभी 471 ग्राम पंचायतों में 7 तारीख को “चावल महोत्सव” मनाने की तैयारी की जा रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि कई हितग्राहियों को पिछले तीन माह से राशन का चावल नहीं मिला है।

ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों में योजनाओं को सफल दिखाने के लिए झूठी खबरें और विज्ञप्तियां जारी करवा रहे हैं, जबकि हकीकत में गरीब परिवारों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है।

मुख्य सवाल खड़े हो रहे हैं:

जब तीन महीने का चावल वितरण ही नहीं हुआ, तो महोत्सव किस बात का?

क्या अधिकारियों द्वारा आंकड़ों में हेरफेर किया जा रहा है?

क्या शासन को गलत जानकारी भेजी जा रही है?

ग्रामीणों की मांग:

पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए

दोषी अधिकारियों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई हो

सभी पात्र हितग्राहियों को बकाया राशन तुरंत वितरित किया जाए

यह मामला सीधे तौर पर गरीबों के हक और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की पारदर्शिता से जुड़ा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह एक बड़ा प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का संकेत है।

 प्रशासन और जिला अधिकारियों को चाहिए कि वे इस मामले पर तुरंत संज्ञान लें, ताकि योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंचे, न कि केवल कागजों तक सीमित रह जाए

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