कवर्ध कबीर ःः कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री अवनीश कुमार शरण ने ऐसे अधिकारी-कर्मचारी जो किसी बीमारी से पीड़ित है तथा शासकीय कार्य संपादन करने में सक्षम नहीं है, उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्त करने हेतु विधि संगत कार्रवाई करने के निर्देश दिये है। उन्होंने सभी विभाग प्रमुखों को परिपत्र जारी कर कहा है कि लोकसभा निर्वाचन 2019 के संपादन हेतु अधिकारी- कर्मचारियों की ड्यूटी लगाये जाने पर अस्वस्थ्य होने के कारण निर्वाचन से मुक्त रखे जाने हेतु आवेदन पत्र भेजा जा रहा है। ऐसे अधिकारी-कर्मचारी जो किसी बीमारी से पीड़ित है तथा शासकीय कार्य संपादन में सक्षम नहीं है, उन्हें छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय महानदी भवन अटल नगर रायपुर द्वारा 25 अप्रैल 2017 को जारी पत्र के तहत 50 वर्ष की आयु अथवा 20 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर शासकीय सेवकों के अभिलेखों की छानबीन कर अनिवार्य सेवानिवृत्त के संबंध में विधि संगत कार्यवाही करना सुनिश्चित करें।
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कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की विशेष रिपोर्ट हल्बा जनजाति की संस्कृति और परंपरा को मिला नया सम्मान शोध आधारित महत्वपूर्ण पुस्तक का हुआ भव्य विमोचन प्रदेश की आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को सहेजने की दिशा में आज एक ऐतिहासिक पहल देखने को मिली, जब हल्बा जनजाति की समृद्ध संस्कृति, परंपरा, रीति-रिवाज और सामाजिक विरासत पर आधारित शोधपूर्ण पुस्तक का भव्य विमोचन प्रदेश सरकार के कद्दावर आदिवासी मंत्री माननीय श्री केदार कश्यप जी के करकमलों द्वारा किया गया। यह गरिमामयी कार्यक्रम माननीय मंत्री निवास कार्यालय में आयोजित हुआ, जहां आदिवासी समाज के अनेक गणमान्य लोग एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम में केंद्रीय गोंड महासभा के अध्यक्ष श्री एम डी ठाकुर साहब, डॉ. भागेश्वर पात्र जी एवं राजेश छेदावी जी की विशेष गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और भी ऐतिहासिक बना दिया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपरा केवल इतिहास नहीं बल्कि हमारी पहचान और गौरव है। हल्बा जनजाति की सांस्कृतिक विरासत को शोध के माध्यम से पुस्तक के रूप में प्रस्तुत करना समाज के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। इस पुस्तक में हल्बा जनजाति की परंपराएं, लोक संस्कृति, सामाजिक व्यवस्था, धार्मिक मान्यताएं, रीति-रिवाज और ऐतिहासिक पहलुओं को विस्तार से शामिल किया गया है, जिससे आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों और संस्कृति को बेहतर ढंग से समझ सकेंगी। मंत्री श्री केदार कश्यप जी ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश सरकार आदिवासी संस्कृति और विरासत के संरक्षण के लिए लगातार कार्य कर रही है और ऐसे शोध कार्य समाज को नई दिशा देने का काम करते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इस पहल की जमकर सराहना करते हुए इसे आदिवासी समाज की सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम बताया। आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और समाज को उसकी पहचान से जोड़ने की दिशा में यह पहल निश्चित रूप से मील का पत्थर साबित होगी। डी एन योगी कबीर क्रांति न्यूज़
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