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देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

आंगनबाड़ी पूरक पोषण योजना में अनियमितता के आरोप, पर्यवेक्षक से स्पष्टीकरण तलब

1. आंगनबाड़ी केन्द्रों के निरीक्षण में केवल औपचारिकता निभाई जाती है,

2. गर्म भोजन एवं रेडी-टू-ईट (RTE) खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की समुचित निगरानी नहीं की जाती,

3. आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में मानसिक उत्पीड़न की भावना व्याप्त है,

4. स्वसहायता समूहों से कथित रूप से मासिक ‘कमीशन’ वसूला जाता है।

कवर्धा***कबीरधाम जिले अंतर्गत कुकदुर एकीकृत बाल विकास परियोजना (ICDS) में कार्यरत पर्यवेक्षक श्रीमती अनिता बंजारा पर पूरक पोषण कार्यक्रम में अनियमितता के गंभीर आरोप लगे हैं। परियोजना अधिकारी ने इस संबंध में उन्हें तीन दिवस के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने का नोटिस जारी किया है।

यह कार्यवाही तब की गई जब दिनांक 13 मई 2025 को प्रमुख क्षेत्रीय समाचार पत्रों ‘स्वदेश’ एवं ‘स्वदेश ज्योति’ में पर्यवेक्षक पर आरोपों से जुड़ी खबरें प्रकाशित हुईं। समाचारों में बताया गया कि पर्यवेक्षक द्वारा—

1. आंगनबाड़ी केन्द्रों के निरीक्षण में केवल औपचारिकता निभाई जाती है,

2. गर्म भोजन एवं रेडी-टू-ईट (RTE) खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की समुचित निगरानी नहीं की जाती,

3. आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में मानसिक उत्पीड़न की भावना व्याप्त है,

4. स्वसहायता समूहों से कथित रूप से मासिक ‘कमीशन’ वसूला जाता है।

 

परियोजना अधिकारी द्वारा जारी पत्र में उल्लेख किया गया है कि यदि स्पष्टीकरण निर्धारित अवधि में नहीं दिया गया या जवाब असंतोषजनक पाया गया, तो अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित पर्यवेक्षक की होगी।

समाजिक योजना पर सवाल:

एकीकृत बाल विकास योजना का उद्देश्य बच्चों, गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में इस प्रकार के आरोप न केवल योजनाओं की साख पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि समाज के सबसे कमजोर वर्गों को प्रभावित कर सकते हैं।

प्रशासन की तत्परता:
परियोजना अधिकारी की ओर से तत्काल संज्ञान लेना और स्पष्ट कार्रवाई की चेतावनी देना प्रशासन की सक्रियता को दर्शाता है। प्रतिलिपि जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं अनुभागीय अधिकारी (रा.) पंडरिया को भी भेजी गई है जिससे उच्चाधिकारियों को भी तत्काल जानकारी दी जा सके।

पूर्व घटनाओं की पड़ताल जरूरी:
यह पहली बार नहीं है जब ICDS में इस प्रकार के आरोप सामने आए हों। राज्यभर में समय-समय पर पूरक पोषण, वितरण प्रणाली और सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं। यह घटनाक्रम एक बार फिर पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने की आवश्यकता की ओर इशारा करता है।

नजरें अब जवाब पर

अब सबकी निगाहें श्रीमती अनिता बंजारा द्वारा दिए जाने वाले स्पष्टीकरण पर टिकी हैं। यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या यह एक प्रशासनिक लापरवाही का मामला है या किसी गहरी जड़ जमा चुकी प्रणालीगत समस्या का।

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