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 महाराष्ट्र के अकोला जिले के  कोथली नामक स्थान में हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर बानरों का भोज कराया गया

भगवा लपेटे खड़े उस साधु के लिए मन में यूँ ही श्रद्धा का भाव उपज रहा है। उनकी साधना, उनका तप नमन के योग्य है।

डी एन योगी कबीर क्रांति

महाराष्ट्र के अकोला जिले के  कोथली नामक स्थान में हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर बानरों का भोज कराया गया। बंदर जैसी उछल कूद करते रहने वाली प्रजाति को इस तरह पंक्तिबद्ध  बैठ कर भोजन करते देखना भी कम आश्चर्यजनक नहीं।
सोच रहा हूँ, इन बंदरो में स्वयं के लिए भरोसा पैदा करना कितना कठिन रहा होगा। कितना कठिन तप करना पड़ा होगा… सामान्य जन मनुष्यों को नहीं साध पाते, कुछ लोग पशुओं को भी साध लेते हैं। भगवा लपेटे खड़े उस साधु के लिए मन में यूँ ही श्रद्धा का भाव उपज रहा है। उनकी साधना, उनका तप नमन के योग्य है।
सुखद यह भी है कि बंदर और मानुष एक ही पंक्ति में बैठ कर भोजन कर रहे हैं। समानता-असमानता के निरंतर चलते द्वंद और विमर्शों के बीच मानुष का बानरों की पंक्ति में बैठ कर भोजन करना मन मोह रहा है।  अत्यधिक श्रद्धा होने का एक कारण यह भी है कि तमाम सकारात्मक खबरों के बीच कहीं न कहीं से कोई ऐसी तस्वीर आ जाती है कि देख कर मन झूम उठता है।

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