जिले में संचालित आश्रम , छात्रावास, कस्तूरबा, एकलव्य विद्यालयों के पीछे जितना खर्च किया जाता है उसके अनुरूप वहां पर आवासीय शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चो की शिक्षा के स्तर पर सुधार दिखाई नहीं देता। जो चिंतनीय है। इस पर विभागीय अधिकारियों के अलावा बच्चो के पालकों के साथ क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को भी ध्यान देते हुए नियमित निरीक्षण और मार्गदर्शन की आवश्यकता है।
दाल भात केंद्र में तब्दील हुआ कबीरधाम जिले का आश्रम छात्रावास, बच्चो की उपस्थिति कम बावजूद वुर्ण हाजिरी

दाल भात केंद्र में तब्दील हुआ कबीरधाम जिले का आश्रम छात्रावास, बच्चो की उपस्थिति कम बावजूद वुर्ण हाजिरी
कवर्धा डी एन योगी कबीर क्रांति
कवर्धा, कबीरधाम जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा सौ से अधिक आश्रम शाला और छात्रावास संचालित है वही एकलव्य , कस्तूरबा आवासीय विद्यालय भी संचालित है जिसमें लगातार बच्चो की उपस्थिति कम रहता है लेकिन वहा पर तैनात अधीक्षक के द्वारा सत प्रतिशत उपस्थिति भर कर शिष्यवृति की राशि को हजम कर रहे हैं साथ ही वर्तमान में सभी छात्रावास और आश्रमों में बच्चो की संख्या नही के बराबर है । बच्चो की उपस्थिति कम तो है ही उन्हें शासन द्वारा निर्धारीत मीनू के अनुसार भोजन , नाश्ता भी नही दिया जाता। जिसकी पुष्टि वहा मौजूद बच्चो और रिकार्ड को देखकर किया जा सकता है। पिछले शिक्षा सत्र में भी यही स्थिति रहा है बावजूद पूर्ण उपस्थिति दर्शाकर सरकारी धन को हजम कर लिया जाता है ।
बच्चो की उपस्थिति कम बावजूद पूर्ण हाजिरी
जिले में सौ से अधिक आश्रम और छात्रावास संचालित है । सभी कक्षाओं की परीक्षा भी लगभग पूर्ण हो गया है । स्थानीय परीक्षाओ का परिणाम भी घोषित किया जा चुका है और बच्चे अपने घर चले गए है । ऐसा प्रतिवर्ष होता है लेकिन वहा तैनात अधिक्षक पूर्ण उपस्थिति भरकर बच्चो के लिए शासन से जारी राशि को हजम कर लेते है । जिले में संचालित कोई भी आश्रम , छात्रावास में पचास प्रतिशत बच्चो की उपस्थिति दर्ज संख्या के अनुसार नही है ।
मीनू का पालन नहीं
आश्रम , छात्रावास में निवास करने वाले बच्चो की संपूर्ण विकास को ध्यान में रखते हुए शासन के द्वारा भोजन और नाश्ता के लिए अलग अलग दिन के लिए अलग अलग मीनू चार्ट तैयार किया है साथ ही सप्ताह में एक दिन बच्चो के रुचि के अनुसार भोजन कराए जाने का प्रावधान है लेकिन सारे नियम कायदों को किनारे करते हुए वहा मौजूद मीनू चार्ट को छोड़कर अपने अनुसार भोजन नाश्ता दिया जाता है। कुछ छात्रावास और आश्रमों के बच्चो को नाश्ता ही नही दिया जाता कभी कभार पोहा देकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वाहन कर दिया जाता है। जिम्मेदार आधिकारी झांकने भी नही जाते ।
शासन के मंशा पर पानी फेर रहे है अधिकारी
छत्तीसगढ़ के दूरदराज के इलाकों में स्कूल छोड़ने की दर को कम करने के उद्देश्य से, छत्तीसगढ़ सरकार ने छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में आदिवासी छात्र/छात्राओं के लिए छात्रावास/आश्रम का संचालन किया जा रहा है लेकिन यहां पर कई छात्रावास आश्रमों में शासन द्वारा निर्धारीत सीट पर भी बच्चो को भर्ती नही कर पाते और कई संस्थाओं में केवल नाम दर्ज रहता है । यदि अधिकारी नियमित रूप से निरीक्षण करे तो वहां भी व्यवस्था में सुधार आने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता।
शिक्षा के स्तर पर सुधार नहीं
- जिले में संचालित आश्रम , छात्रावास, कस्तूरबा, एकलव्य विद्यालयों के पीछे जितना खर्च किया जाता है उसके अनुरूप वहां पर आवासीय शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चो की शिक्षा के स्तर पर सुधार दिखाई नहीं देता। जो चिंतनीय है। इस पर विभागीय अधिकारियों के अलावा बच्चो के पालकों के साथ क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को भी ध्यान देते हुए नियमित निरीक्षण और मार्गदर्शन की आवश्यकता है।




