
आंखों से गयी रोशनी पर जीवन से नही…. देखे खबर…
बालोद,कबीर क्रांति
बालोद,के रहने वाले चंद्रिका प्रसाद लोगों के लिए एक मिसाल हैं. बिना आंखों के चंद्रिका प्रसाद जूते बनाने का काम कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं. एक हादसे में उन्होंने अपनी आंखें गवां दी थी, बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी और जिंदगी के सफर में आगे बढ़ते रहे.
जिले से लगे झलमला गांव के रहने वाले चंद्रिका प्रसाद लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं. चंद्रिका प्रसाद ने समस्या को चुनौती देते हुए खुद के साथ-साथ अपने परिवार को भी संभाला है.
चंद्रिका प्रसाद जूते बनाने का काम करते हैं. एक हादसे की वजह से उन्होंने अपनी आंखें गवां दी, लेकिन आंखें गवांने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने अपनी समस्या को एक चुनौती के तौर पर स्वीकार किया और काम में मन लगाया.
बिना आंखों के जूते बनाकर चलाते हैं जीवन-यापन
बालोद शहर के तिराहा में चंद्रिका प्रसाद जूते बनाने की दुकान चलाते हैं. बिना आंखों के और बिना सहयोग के वो जूते बनाने का काम बखूबी कर लेते हैं. उनका मानना है कि अगर दिक्कत के बारे में सोचते रहेंगे तो कुछ भी हासिल नहीं होगा इसलिए काम में मन लगाकर ही इसे दूर किया जा सकता है.
दिक्कत को दरकिनार कर काम से प्यार
कई बार छोटी-मोटी परेशानी से भी लोग घबरा जाते हैं और आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं. वहीं किसी भी प्रकार की शारीरिक समस्या हो तो भीख मांगकर जीवन-यापन करते हैं लेकिन चंद्रिका प्रसाद ने आत्म सम्मान के साथ जीवन जीने का रास्ता चुना. इतना ही नहीं परिवार की जिम्मेदारी को भी बखूबी निभा रहे हैं. लिहाजा सभी को चंद्रिका प्रसाद से प्रेरणा लेनी चाहिए.
अंधियारे को बनाया उजियारा, मदद की दरकार
अगर शासन-प्रशासन चंद्रिका प्रसाद की मदद करें तो वे मेहनत कर और भी आगे बढ़ सकते हैं.




