कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ *विशेष लेख* *सीड बॉल अभियान- हरियाली बढ़ाने का सरल और प्रभावी माध्यम* *जनभागीदारी से साकार हो रहा हरित छत्तीसगढ़ का संकल्प* धनंजय राठौर संयुक्त संचालक अशोक कुमार चंद्रवंशी सहायक जनसंपर्क अधिकारी सीड बॉल पर्यावरण को हरा-भरा बनाने और वनीकरण (रिफॉरेस्टेशन) का एक बेहद सरल, किफायती और अत्यधिक प्रभावी माध्यम है। इसमें बीजों को मिट्टी और जैविक खाद के मिश्रण से छोटी-छोटी गोलियों के रूप में सुरक्षित कर दिया जाता है, जिससे वे बिना मेहनत के दुर्गम स्थानों पर भी उग जाते हैं। सीड बॉल- बीज, मिट्टी (मुख्य रूप से चिकनी मिट्टी) और जैविक खाद (गोबर या वर्मीकम्पोस्ट) का एक छोटा और सूखा गोला होता है। बीजों को इस प्राकृतिक आवरण में लपेटकर सुखा लिया जाता है। मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद जब मिट्टी में पर्याप्त नमी हो, तब सीड बॉल्स का उपयोग करना सबसे अच्छा होता है। इन्हें यात्रा करते समय या खाली जगहों पर पैदल चलते हुए मिट्टी पर बिखेर दें। पानी के संपर्क में आते ही ये पौधे के रूप में विकसित होना शुरू हो जाती हैं। बारिश का मौसम पौधारोपण और वनों के विस्तार के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। इसी उद्देश्य से वन विभाग द्वारा सीड बॉल (बीज गोला) अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान जनभागीदारी के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने का प्रभावी प्रयास है, जहाँ पौधारोपण करना कठिन होता है। *क्या है सीड बॉल?* सीड बॉल मिट्टी, गोबर या जैविक खाद और विभिन्न वृक्षों के बीजों से तैयार किया गया छोटा गोलाकार गोला होता है। इसे जंगलों, पहाड़ियों, खाली भूमि और दुर्गम क्षेत्रों में फेंक दिया जाता है। वर्षा का पानी मिलने पर बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेते हैं। *वन विभाग का हरित अभियान* मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा एक पेड़ मां के नाम, वन महोत्सव तथा युवा फॉर नेचर जैसे अभियानों के साथ सीड बॉल कार्यक्रम को भी व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है। स्कूलों, महाविद्यालयों, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से हजारों-लाखों सीड बॉल तैयार कर जंगलों और खाली भूमि में डाली जा रही हैं। *जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका* सीड बॉल में महुआ, इमली, हर्रा, बहेड़ा, जामुन, करंज, नीम, बरगद, पीपल, आम, जामुन, शाल, बीजा, चार, खमार सहित स्थानीय प्रजातियों के बीजों का उपयोग किया जाता है। इससे प्राकृतिक वनों का विस्तार होता है, वन्यजीवों को भोजन और आश्रय मिलता है तथा जैव विविधता का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है। *पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम* सीड बॉल अभियान से हरित आवरण बढ़ने के साथ-साथ जल संरक्षण, मिट्टी के क्षरण या कटाव में कमी, कार्बन अवशोषण तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में भी सहायता मिलती है। यह कम लागत में अधिक क्षेत्र को हरित बनाने का प्रभावी उपाय है। *जनभागीदारी से बनेगा हरित भविष्य* वन विभाग का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना भी है। जब बच्चे, युवा, महिलाएं और ग्रामीण इस अभियान से जुड़ते हैं, तो हर व्यक्ति प्रकृति संरक्षण का सहभागी बनता है। *हर नागरिक निभाए अपनी जिम्मेदारी* यदि प्रत्येक नागरिक वर्षा ऋतु में कुछ सीड बॉल तैयार कर उपयुक्त स्थानों पर डाले या पौधारोपण में भागीदारी करे, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ का हरित क्षेत्र और अधिक समृद्ध होगा। सीड बॉल अभियान प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी निभाने का एक सरल, सुलभ और प्रभावी माध्यम है। Spread the love Post navigation कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ *सफलता की कहानी* *आधुनिक सूकरपालन से स्वरोजगार: 400 से अधिक सूकरों के साथ ग्रेसी ने लिखी सफलता की नई इबारत* *बीएससी एग्रीकल्चर ग्रेजुएट युवती ने सरकारी सहायता से स्वरोजगार को बनाया सफलता की मिसाल* *नेशनल लाइव स्टॉक मिशन से मिली 30 लाख रुपये की सब्सिडी, आधुनिक फार्म में 400 से अधिक सूकर* धनंजय राठौर संयुक्त संचालक, जनसंपर्क संचालनालय, रायुपर कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिए डी. एन. योगी और अमित शर्मा की रिपोर्ट** 2 किलोमीटर कीचड़ भरे रास्ते से गुजरने को मजबूर ग्रामीण, स्कूली बच्चों और मरीजों की जान जोखिम में** पंडरिया। पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत घुटुरकुंडी में मुख्य मार्ग से पर्णकुटी मोहल्ला तक जाने वाला लगभग 2 किलोमीटर लंबा कच्चा मार्ग बारिश के दिनों में पूरी तरह कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से सड़क निर्माण नहीं होने के कारण आमजन, स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आपके द्वारा उपलब्ध कराई गई तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि स्कूली बच्चे नंगे पैर कीचड़ से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं, जबकि सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढों और पानी भरने से दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार पर्णकुटी मोहल्ले में लगभग 200 लोग निवास करते हैं और करीब 50 बच्चे प्रतिदिन इसी रास्ते से स्कूल आते-जाते हैं। मोहल्ले में प्राचीन श्री राधा-कृष्ण, जगन्नाथ, शिव एवं हनुमान मंदिर स्थित हैं, जहां प्रतिवर्ष तीन दिवसीय भव्य मड़ाई मेला आयोजित होता है और हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी की तबीयत अचानक बिगड़ जाए तो एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। मरीजों और गर्भवती महिलाओं को खाट पर उठाकर लगभग 2 किलोमीटर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। आरोप है कि कई बार समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने से जान तक चली गई। ग्रामीणों ने सरपंच, सचिव एवं पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा से मांग की है कि इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता देते हुए तत्काल पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को इस परेशानी से राहत मिल सके। फोटो: कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल जाते मासूम बच्चे और सड़क की बदहाल स्थिति ग्रामीणों की पीड़ा खुद बयां कर रही है। — कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ रिपोर्ट: डी. एन. योगी एवं अमित शर्मा