कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ पाकिस्तान में न्यायपालिका पर बड़ा सवाल! फर्जी लॉ डिग्री के सहारे 5 साल तक हाई कोर्ट में फैसले सुनाता रहा जज पड़ोसी देश पाकिस्तान से सामने आया हैरान कर देने वाला मामला— जस्टिस तारिक महमूद जहांगीरी पर नकली लॉ डिग्री के आधार पर न्यायिक कार्य करने का गंभीर आरोप साबित हुआ है। क्या है पूरा मामला? दिसंबर 2020 में हाई कोर्ट के जज नियुक्त 5 वर्षों तक सुनाते रहे अहम फैसले सितंबर 2025 से न्यायिक कार्यों से रोके गए अदालत ने कई बार मांगे मूल दस्तावेज और लिखित जवाब लेकिन जस्टिस जहांगीरी कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सके कोर्ट का सख्त रुख— “कई अवसर देने के बावजूद असली दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए,” जिसके बाद उन्हें न्यायिक कार्य से अलग कर दिया गया। न्याय व्यवस्था पर करारा तमाचा! जब जज ही फर्जी निकले, तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा? यह मामला न केवल व्यक्ति विशेष पर, बल्कि पूरी न्यायिक प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। न्याय के मंदिर में फर्जीवाड़ा—पूरे देश में मचा हड़कंप! कबीर_क्रांति ब्रेकिंग_न्यूज़ पाकिस्तान फर्जी_जज नकली_डिग्री न्यायपालिका_पर_सवाल Spread the love Post navigation कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ *विधायक भावना बोहरा ने विधानसभा में नल जल योजना, स्थनीय रोजगार एवं उद्योग व महिला श्रमिकों के हित का उठाया मुद्दा* कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़, देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार! भाटापारा रेलवे स्टेशन के समीप प्राचार्य को ACB ने घूस लेते रंगे हाथों पकड़ा रायपुर। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मोपका, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा के प्राचार्य आर.एन. बया को एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर की टीम ने ₹15,000 की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई भाटापारा रेलवे स्टेशन के समीप की गई। पूरा मामला क्या है? मोपका निवासी खेमेश्वर डाडे ने ACB में शिकायत की थी कि उनके पिता विजय कुमार डाडे, जो विद्यालय में व्याख्याता हैं, वर्ष 2017–18 में दुर्घटना के बाद दिव्यांग हो गए थे। इसके बावजूद वे नियमित रूप से सेवाएं देते रहे। आरोप है कि प्राचार्य वेतन आहरण के बदले हर माह ₹10,000 की अवैध मांग करता था। कई बार यह रकम नकद के बजाय सीधे बैंक खाते में जमा कराई गई। 6 माह पहले रिश्वत बढ़ाकर ₹15,000 कर दी गई। रकम न देने पर 6 महीने का वेतन रोक दिया गया। कार्रवाई कैसे हुई? वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत के बाद भी कार्रवाई न होने पर पीड़ित ने ACB का रुख किया। ACB ने सत्यापन के बाद 25 फरवरी 2026 को ट्रैप ऑपरेशन किया और आरोपी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। कानूनी कार्रवाई ACB के अनुसार, आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। संदेश साफ है— वेतन जैसे मूल अधिकार के बदले रिश्वतखोरी बर्दाश्त नहीं भ्रष्टाचारियों पर सख्त कार्रवाई जारी कबीर_क्रांति ब्रेकिंग_न्यूज़ ACB_Action घूसखोरी भ्रष्टाचार_पर_वार भाटापारा