कवर्धा

सीईओ जिला पंचायत की प्रताड़ना का बड़ा मामला उजागर

सीईओ जिला पंचायत की प्रताड़ना का बड़ा मामला उजागर

राजीव गांधी शिक्षा मिशन के कर्मचारियों का बिना कारण ढाई महीने से वेतन रोका

*कवर्धा* राजीव गांधी शिक्षा मिशन के पूरे स्टाफ को बिना कारण ढाई महीनों से वेतन न देकर उन्हें सीईओ जिला पंचायत द्वारा आर्थिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है बताया जाता है कि सीईओ जिला पंचायत ने सिर्फ इस बात पर सभी कर्मचारियों का वेतन ढाई महीने से रोक दिया है कि इस विभाग में संविदा पर कार्यरत कर्मियों की सेवा वृद्धि की कागजी कार्यवाही अधूरी है जबकि इस मामले में चूक करने वाले अधिकारी से कारण पूछ कर कार्यवाही पूरी की जानी थी इसके लिए कर्मियों का वेतन रोकना आवश्यक नहीं था.संविदा कर्मी पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में शासन की जानकारी में पिछले 15- 20 वर्षों से लगातार काम करते चले आ रहे हैं जिन पर कभी कहीं इस प्रकार की कठोर कार्यवाही बिना कारण के नहीं की गई थी.

सीईओ जिला पंचायत की वेतन रोकने वाली यह कार्यवाही उनकी प्रशासनिक अपरिपक्वता को दर्शाती है क्योंकि संविदा कर्मी स्वयं अपनी सेवा वृद्धि नहीं करते बल्कि उनकी सेवा वृद्धि डीएमसी के प्रस्ताव पर स्वयं सीईओ जिला पंचायत के द्वारा अनुमोदित होती है यदि सेवा वृद्धि की कागजी कार्यवाही किसी कारण से पूर्ववर्ती अधिकारियों ने नहीं की है तो इसके कारणों को ज्ञात कर शीघ्र इसकी औपचारिकताओं को पूरा करना चाहिए संविदा कर्मियों की सेवा वृद्धि करने का दायित्व भी स्वयं सीईओ जिला पंचायत का है क्योंकि सीईओ जिला पंचायत को राजीव गांधी शिक्षा मिशन का जिला परियोजना संचालक बनाया गया है तथा मिशन का प्रत्येक काम सीईओ जिला पंचायत के अनुमोदन पर ही कलेक्टर द्वारा स्वीकृत होता है लेकिन अपने कर्तव्यों से आंख मूंदकर संविदा कर्मियों की सेवा वृद्धि करने के बजाय उनका वेतन ही रोक दिया है मानो सेवा वृद्धि नहीं होने के लिए संविदा कर्मी ही दोषी हो.

सोचने वाली बात तो यह है कि सीईओ जिला पंचायत ने स्वयं ही मिशन कार्यालय पर अपना अधिकार जताते हुए 1 साल पहले उसे d.e.o. ऑफिस से अपने ऑफिस लाया जिसके कारण मिशन कार्यालय जिला पंचायत में संचालित हो रहा है और सीईओ जिला पंचायत उन पर अपना सीधा नियंत्रण रखते हुए उनसे नियमित रूप से काम भी ले रहे हैं मगर उन्हें वेतन नहीं दे रहे हैं काम लेते समय उन्हें कर्मचारी मानते हैं और वेतन देने के समय कर्मचारी नहीं मानते सेवा वृद्धि नहीं होने का अड़ंगा लगाते हैं उन्होंने कर्मियों की सेवा वृद्धि करने के बजाय उनका वेतन ही रोक दिया और मामला जांच के लिए दे दिए जो पिछले 2 माह से जांचकर्ता अधिकारी एपीओ एमके साहू के पास लंबित है अमूमन किसी भी मामले की जांच के लिए 1 सप्ताह या 15 दिनों का समय दिया जाता है मगर संविदा कर्मियों के मामले में ढाई महीनों से जांच लंबित है और इस कारण उन्हें वेतन भी नहीं मिल रहा है इस दिशा में उनकी संवेदनशीलता शूण्य है. 31 दिसंबर को संविदा कर्मियों ने वेतन देने की मांग भी की फिर भी उन्हें नए साल में भी वेतन नहीं दिया गया.

बिना कदाचार के 1 दिन का वेतन अभी नहीं रोका जा सकता

कानून के जानकारों का कहना है कि किसी भी शासकीय कर्मचारी के 1 दिन का वेतन रोकने के लिए भी समुचित कारण होना आवश्यक है बिना दोष अथवा कदाचार के किसी भी शासकीय कर्मचारी का 1 दिन का भी वेतन नहीं रोका जा सकता है क्योंकि यह जीवन निर्वाह से संबंधित है लेकिन यहां बिना किसी कारण के ढाई माह से वेतन रोका गया है. जो सीईओ जिला पंचायत के द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र का खुला दुरुपयोग है

राजपत्रित अधिकारियों तथा कलेक्टर दर के श्रमिकों का भी वेतन रोका

सीईओ जिला पंचायत ने मिशन के राजपत्रित श्रेणी के 2 एपीसीआर कलेक्टर दर के श्रमिकों को भी बिना कारण ढाई महीनों से वेतन दे दिया है जबकि वह सेवा वृद्धि की औपचारिकताओं से परे हैं इसके बाद भी उन अधिकारी कर्मचारियों में सीईओ जिला पंचायत के उग्र व्यवहार से इस कदर भय व्याप्त है कि वे वेतन देने की याचना भी नहीं कर पा रहे हैं तथा एक शब्द भी बोलने से डर रहे हैं कर्मचारियों के मन में अपने अधिकारी के प्रति इस प्रकार भय व्याप्त होना सुशासन के लक्षण नहीं है दबा हुआ आक्रोश कभी भी विस्फोटक रूप धारण कर सकता है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता.

इधर राज्य सरकार ने चुनाव के पहले अपने घोषणा पत्र में शामिल किया था कि वे सरकार में आते ही संविदा कर्मियों सहित समस्त अनियमित कर्मचारियों को नियमित करेंगे इस दिशा में अभी सामान्य प्रशासन विभाग में समस्त विभागों को पत्र लिखकर अनियमित कर्मचारियों की जानकारी भी मांगी है लेकिन कबीरधाम में तो संविदा कर्मियों का गंभीर एवं आर्थिक मानसिक शोषण हो रहा है जिसके कारण अभी स्थिति गंभीर होने लगी है.

18.52 लाख के भ्रष्टाचार पर कोई कार्यवाही नहीं
राजीव गांधी शिक्षा मिशन में सीईओ जिला पंचायत की नाक के नीचे पूर्व डीएमसी  एवंं जिला शिक्षा अधिकारी एवं अन्य के द्वारा 18.52 लाख का भ्रष्टाचार करने का मामला सुर्खियों में था मामला प्रमाणित भी हो गया था तथा आरोपियों से 18.52 लाख जमा भी करा लिए गए मगर आरोपियों पर आज तक कोई दंडात्मक कार्यवाही ना करते हुए उन्हें खुला संरक्षण दिया गया जो सीईओ जिला पंचायत की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाता है इससे सरकार की छवि भी धूमिल हुई है दोषियों पर कार्यवाही ना करना तथा निर्दोष कर्मियों का वेतन ढाई ढाई महीने तक रोककर रखना सीईओ जिला पंचायत की तानाशाही प्रवृत्ति प्रताड़ना, और शोषण करने की प्रवृत्ति की ओर इंगित करता है इस पर अब कलेक्टर और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए.

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