कवर्धा

आतंक या अफसरशाही? न्याय के लिए ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित करने को मजबूर हुए ग्रामीण** सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ग्रामीणों को न्याय पाने के लिए ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित करना पड़ रहा है, तो आखिर जिम्मेदार अधिकारी अब तक मौन क्यों हैं? क्या पंचायत व्यवस्था में आम जनता की आवाज़ दबाई जा रही है? यदि ग्राम सभा के निर्णयों पर भी कार्रवाई नहीं होती, तो लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई पर जनता का विश्वास कैसे कायम रहेगा?** कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

आतंक या अफसरशाही? न्याय के लिए ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित करने को मजबूर हुए ग्रामीण**

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ग्रामीणों को न्याय पाने के लिए ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित करना पड़ रहा है, तो आखिर जिम्मेदार अधिकारी अब तक मौन क्यों हैं? क्या पंचायत व्यवस्था में आम जनता की आवाज़ दबाई जा रही है? यदि ग्राम सभा के निर्णयों पर भी कार्रवाई नहीं होती, तो लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई पर जनता का विश्वास कैसे कायम रहेगा?**

कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

कबीरधाम जिले में पंचायत व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस ग्राम पंचायत प्रणाली को गांव के विकास, पारदर्शिता और जनभागीदारी का आधार माना जाता है, वहीं अब ग्रामीणों को अपने ही अधिकारों की रक्षा के लिए ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

ताज़ा मामला जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा अंतर्गत ग्राम पंचायत देहानडीह का है। 24 जून 2026 को आयोजित ग्राम सभा में ग्रामीणों ने खुलकर पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। ग्राम सभा की कार्यवाही पंजिका के अनुसार ग्रामीणों ने सरपंच, सचिव एवं रोजगार सहायक के कार्यों पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।

इतना ही नहीं, ग्राम सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव क्रमांक-03 पारित कर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग भी की गई।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ग्रामीणों को न्याय पाने के लिए ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित करना पड़ रहा है, तो आखिर जिम्मेदार अधिकारी अब तक मौन क्यों हैं? क्या पंचायत व्यवस्था में आम जनता की आवाज़ दबाई जा रही है? यदि ग्राम सभा के निर्णयों पर भी कार्रवाई नहीं होती, तो लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई पर जनता का विश्वास कैसे कायम रहेगा?

अब निगाहें प्रशासन पर हैं।

क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

कबीर क्रांति की मुहिम जारी रहेगी… सच के साथ, जनता के साथ।

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