कवर्धा,डी एन योगी ABVP ने जिलाधीश को अधिकारी कर्मचारी के समर्थन में दिया मांगपत्र (आंदोलन को जल्द समाप्त कर विद्यालय खोले भुपेश सरकार- ABVP) ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ कवर्धा- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद कवर्धा इकाई ने आज माननीय जिलाधीश महोदय को मांग पत्र सौंपा, जिसमें नगर मंत्री श्वेता खांडेकर ने मांग पत्र देते हुए जिलाधीश से महामहीम राज्यपाल के नाम से दिए गए मांगपत्र में कहा कि अभी वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रदेश के 6 लाख कर्मचारी अधिकारी ,शिक्षक आंदोलन में है, उन्हें केंद्र के समान 34% महंगाई भत्ता देने की आवश्यकता है। परंतु उनकी जायज मांगों को सरकार ध्यान नहीं दे रही है ,जिसके कारण संपूर्ण छत्तीसगढ़ में तालाबंदी की नौबत आ गई है । सभी विद्यालय बंद पड़े हैं पूर्व में भी 2 साल कोरोना वायरस था, पूरी तरीके से शिक्षा डगमगा गई थी ,जिसके कारण सबसे ज्यादा किसी को हानि हुई है तो छात्रों को हुई है, विद्यार्थी अभी पढ़ना चाह रहा था ,तो छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार शिक्षकों के जायज मांग को पूरा नहीं कर रहे हैं, जिस पर एबीवीपी अपना रोष व्यक्त करती है, विद्यार्थी परिषद ने जिलाधीश को कहा है कि जल्द से जल्द अधिकारी और कर्मचारियों की मांग पूरी तरीके से मानी जाए और विद्यालय सुचारू रूप से लगाया जाए, ताकि विद्यालय में पढ़ाई गुणवत्ता पूर्ण तरीके से चालू किए हो सके, परंतु छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार हर तरीके से छात्रों को कष्ट दे रही है आय -जाति निवास आदि के छात्र तहसील कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं मगर आंदोलन कारण सभी ठप पड़े हुए हैं, अधिकारी कर्मचारियों के मांग को जल्द से जल्द पूरा नहीं किया जाए और शिक्षकों की व्यवस्था विद्यालय में नहीं होती तो एबीवीपी सड़क में उतर कर उग्र प्रदर्शन छात्रों के साथ मिलकर करेगी। जिलाधीश को ज्ञापन देने हेतु नगर मंत्री श्वेता खांडेकर ,नगर उपाध्यक्ष प्रशांत बंजारे ,गोपाल ठाकुर ,उदय तिवारी, दीपेश कुंभकार, माधुरी जयसवाल, ईशा भारद्वाज, गुरु नारायण वर्मा, गजाधर वर्मा, केशव नाथ योगी, गिरिराज साहू, रोशन ठाकुर ,मुकेश , खेमराज धनेश्वर ,कुणाल डेहरिया,आशीष बाचकर, रवि झरिया, नीलिमा ठाकुर, आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे। जारीकर्ता श्वेता खांडेकर नगर मंत्री कवर्धा Spread the love Post navigation थाना बोडला पुलिस द्वारा अवैध मादक पदार्थ गांजा तस्करो के विरूद्ध लगातार कार्यवाही। बैगा जनजाति प्रकृति पुत्र जो जंगलों को अपना सब कुछ मानते हैं, जंगल में ही पला बढ़ा है और जंगल में ही मर मिटते हैं। बैगा संस्कृति को आज के आधुनिक परिवेश से बचाकर रखना होगा।