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स्टेट वेयर हाऊसिंग घोटाला : पीएमओ के निर्देश के बाद भी अधिकारियों ने मामला दबा रखा,भ्रष्ट्राचारी जाँच में पहुंचा रहे आंच

रायपुर: छत्तीसगढ़ स्टेट वेयर हाऊसिंग कॉर्पोरेशन द्वारा धर्मकांटा लगाने के लिए हुए टेंडर में बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया है. टेंडर में सबसे कम दर पर निविदा भरने वाली कंपनी को अपात्र घोषित कर ऐसी कंपनियों को टेंडर दे दिया गया है जिन्होंने ज्यादा दर भरा था. इस पूरे मामले में तकरीबन 80 लाख रुपये की गड़बड़ी किये जाने का आरोप है.  इसके साथ ही जिन तीन कंपनियों को टेंडर दिया गया है उन पर निविदा की कई शर्तों को पूर्ण नहीं करने का भी आरोप लगा है. इस मामले में टेंडर में शामिल होने वाले श्री श्याम टेक्नो के डायरेक्टर देवेश मरोदिया ने इसकी शिकायत वेयर हाउसिंग के अधिकारियों से की.

पीएमओ द्वारा दिया गया आदेश

लेकिन मामले में अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं करने पर उन्होंने पीएमओ में गुहार लगाई. पीएमओ के आदेश पर 6 सितंबर 2018 को एक कमेटी का गठन किया गया. इस कमेटी में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में पदस्थ विशेष सचिव मनोज कुमार सोनी और राजीव कुमार जायसवाल, संयुक्त संचालक खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण थे. दोनों अधिकारियों को जांच कर दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया था. शिकायतकर्ता ने इस मामले से संबंधित 170 पेज के दस्तावेज अधिकारियों को सौंपा.

कमेटी गठित करने की आदेश कॉपी

लेकिन महिनों बीत जाने के बाद भी जब इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई तो श्री श्याम टेक्नो के डॉयरेक्टर देवेश मरोदिया ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए 1 महीने के भीतर कमेटी को जांच कर याचिकाकर्ता को इसकी जानकारी देने कहा था, लेकिन वेयर हाउस के अधिकारियों ने हाईकोर्ट के इस आदेश को दरकिनार करते हुए फरवरी बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की.

दस्तावेजों के मुताबिक छत्तीसगढ़ स्टेट वेयर हाऊसिंग कार्पोरेशन द्वारा पिछले साल 17 अप्रैल 2018 को 20 धर्मकांटा लगाने का टेंडर जारी किया था. जिसे चार ग्रुपों में विभाजित कर दिया गया था. एक ग्रुप में 5 धर्मकांटा को शामिल किया गया था. इसमें एक धर्मकांटा लगाने की अनुमानित लागत 15.60 लाख रुपये रखी गई थी. इसमें जिन चार कंपनियों एक्मे ऑटोमेशन प्रायवेट लिमिटेड, वेटेक स्केल प्रायवेट लिमिटेड, डिजिटल वेनिंग सिस्टम प्रायवेट लिमिटेड और वेटेक सिस्टम को टेंडर दिया गया. इन कंपनियों के अलावा श्री श्याम टेक्नो भी निविदा में शामिल था जिसे सबसे कम कीमत भरने के बावजूद अपात्र घोषित कर दिया गया.

श्रीश्याम टेक्नो के डायरेक्टर देवेश का आरोप है कि 31 जुलाई को निविदा खोली गई जिसमें ग्रुप 1 के लिए एक्मे ऑटोमेशन प्रायवेट लिमिटेड को 18 लाख 80 हजार के हिसाब से 5 धर्मकांटा के लिए 94 लाख रुपये टेंडर भरा था. जबकि श्री श्याम टेक्नो ने 14 लाख 28 हजार 110 रुपये के हिसाब से 5 धर्मकांटा के लिए 71 लाख 40 हजार 550 रुपये निविदा दर भरी थी लेकिन वेयर हाउस के अधिकारियों ने ज्यादा कीमत भरने वाले एक्मे ऑटोमेशन को टेंडर दे दिया गया.

इसी तरह वेटेक स्केल प्रायवेट लिमिटेड ने ग्रुप 2 के लिए 17 लाख 21 हजार के हिसाब से 5 धर्मकांटा के लिए 86 लाख 5 हजार रुपये का टेंडर भरा था. वहीं श्री श्याम टेक्नो द्वारा इस ग्रुप के लिए 14 लाख 34 हजार 110 रुपये के हिसाब से 5 धर्मकांटे के लिए 71 लाख 70 हजार 550 रुपये टेंडर भरा था. यहां भी कम टेंडर भरने वाले श्री श्याम टेक्नो को दरकिनार कर ज्यादा टेंडर भरने वाले वेटेक स्केल प्रायवेट लिमिटेड को काम दे दिया गया.

ग्रुप नंबर 3 के लिए डिजिटल वेनिंग सिस्टम प्रायवेट लिमिटेड ने 18 लाख 70 हजार रुपये प्रति धर्मकांटे के हिसाब से 5 धर्मकांटा के लिए 93 लाख 50 हजार रुपये भरा. जबकि श्री श्याम टेक्नो ने 14 लाख 34 हजार 110 रुपये के हिसाब से पांचो धर्मकांटे के लिए 71 लाख 70 हजार 550 रुपये भरा लेकिन यहां भी सबसे कम टेंडर भरने वाले श्री श्याम टेक्नो के बजाय डिजिटल वेनिंग सिस्टम प्रायवेट लिमिटेड को टेंडर दे दिया गया.

वहीं ग्रुप नंबर 4 के लिए वेटेक स्केल प्रायवेट लिमिटेड ने 18 लाख 91 हजार प्रति धर्मकांटे के हिसाब से 5 धर्मकांटा के लिए 94 लाख 55 हजार में निविदा भरी. उधर श्री श्याम टेक्नो ने 15 लाख 15 हजार 110 रुपये के हिसाब से 75 लाख 75 हजार 550 रुपये भर लेकिन वेयर हाउस के अधिकारियों द्वारा वेटेक स्केल को टेंडर दिया गया.

इस तरह चारों ग्रुप को मिलाकर राज्य शासन को 77 लाख 52 हजार 200 रुपये की क्षति पहुंचाई.

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