कवर्धादुर्ग

मैं भी रोजे रख्खूगी, या अल्लाह तौफीक दे**अमायरा फ़ातिमा

मैं भी रोजे रख्खूगी, या अल्लाह तौफीक दे**अमायरा फ़ातिमा
डी एन योगी कवर्धा,*करामत-ए-नबीये-पाक** मस्जिद ए नबवी में एक बार
प्यारे नबी सहाबा रज़ि अल्ला अनहुसे खिताब कर रहे थे की
एक यहूदी बे धड़क आकर कहने
लगा मैंने सुना है के आप अपने आप को अल्लाह का रसूल बता रहे है ।आप पे अल्लाह का कलाम नाज़िल होता है
आप अल्लाह से बाते करते हो आप फ़रिश्तों से बाते करते हो
क्या यह बात सच है ।हुजूर सल्ललाहु अलैहि व सल्लम आप ने कहा आप ने सही सुना है।हा मैं अल्लाह का नबी हूं।मुझपेअल्लाह का कलाम नाज़िल होता है,मुझ पे फ़रिश्तें उतरते है।तोउस यहूदी ने कहा मैं नही मानता आप झूट कहते है।अल्लाह के रसूल कहते है मैं अल्लाह का नबी हु यह आप पर साबीत करने के लिए मुझे क्या करना पड़ेगा जिस से आपको यकीन हो जाये।यहूदी कहने लगा मैं जो आप को एक काम दूंगा वह वाकईं आप कर दो तो मैं मान लूंगा के आप वाकईं अल्लाह के रसूल है ।इस बात परअल्लाह के रसूल ने कहा क्या काम दोगे,क्या चाहते हो।उस यहूदिने अपने कुर्ते के ज़ेब से कुछ खजूर कीगुठलियां निकाली और कहने लगा लो इसे और ज़मीन में गाड़ दो सुबह तक इस के दरख़्त आने चाहिए और वह भी खजूर फल के साथ।
सारे सहाबा उस यहूदी की बात सुनकर परेशान हो गए
लेकिन जब हुजूर के चेहरे पे
सहाबा ने तब्बसुम देखी तो
उनकी परेशानी थोड़ी कम हुई
अल्लाह के रसूल ने उस यहूदी से कहा कि जगह बता दो कहा पर इस बीज को गाड़नी है।
यहूदी ने उनको जगाह बता दी
आपने खजूर की गुठलियां उस जगह गाड़ दी.हुजूर ने उसमे पानी डाला और अल्लाह की बारगाह में दुआ फरमायी और फिर सब अपने अपने घर चले गए
दूसरे दिन जब सूबह हुई तो
वह यहूदी मस्जिद ए नबवी में आया और कहने लगा चलो
मुझे दिखाओ के वहा खजूर के दरख़्त फल के साथ आये के नही
कुछ सहाबाओं के साथ हुजूर उस यहूदी को लेकर वहां पर आए तो क्या देखते है उस जगह दरख़्त के साथ साथ फल भी लगे हुए है।
सहाबा भी हैरान और वह यहूदी उनसे ज्यादा हैरान के
यह कैसे हुआ ,उसके तो कुछ समझ मे ही नही आ रहा के यह कैसेहो सकता है तो उस यहूदी नेकहा किमैं फल खाकर देखना चाहता हु आपने बेशक आप फल खाकर देखो।जब यहूदी ने दरख़्त से तोड़कर खजूर को खोला तो
अंदर गुठली नही सब हैरान और परेशान के खजूर में गुठली क्यों नही है।यहूदी आपसे कहने लगा कि इसमें गुठली क्यो नही
है।आप ने उस यहूदी को एक
तब्बसुम भरी नज़र से कहा कि इसमें गुठली जरूर होती,अगर रात में तुम ज़मीन खोदकर इसमें से गुठली बीज ना निकाले होते।
सुबहान अल्लाह सारे सहाबा के जिस्म पर कांटे आये नबी की इस बात पर यहूदी तो हुजूर के कदमो में झुक गया और केहने लगा मुझे मुआफ़ कर दीजिए,बेशक आप अल्लाह के सच्चे रसूल है।
मैं आप की तस्दीक करता हूँ
रात को गुठलियां ले जाने वाली बात को सिर्फ मैं ही जानता हूं
और वह कलमा पढ़करमुसलमान होता है।तो साथी हजरात यह है मेरे नबी का पाक मौजजा हैं
और आज भी बगैर गुठली के के खजूर के दरख़्त और खजूर पूरे सबूत के साथ मौजूद है और उसे मैने भी खाए हैमुझे फक्र है मैं अल्लाह के रसूल का उम्मती हु
अल्लाह मेरे नबी ए पाक को
मकामम महमूदा अता करें।
*हाजीमोसलीमहिंगोराकवर्धा *

अल्लाह की इबादत में मशगूल, नन्ही सी, प्यारी बच्ची**अमायरा फ़ातिमा*

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