कबीरधाम जिले में नरूवा बनेगा जल क्राँति का आधार

कवर्धा, । सुराजी गांव योजना से कबीरधाम जिले में भू-जल स्तर को बढाने, ग्रामीणों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने हेतु पहाडी क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों में नदी एवं नालों का सुधार कर जिर्णोद्धार किया जाएगा। ग्लोबल इंर्फामेंशन सिस्टम, भुवन एवं अन्य तकनिकां के माध्यम से पानी के स्त्रोत, बहाव क्षेत्र की पहचान एवं पानी रोक कर भू-जल स्तर बढाने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वन विभाग एवं जल संसाधन विभाग का तकनिकी अमला आपस में मिल कर कार्य कर रहें है। जिलें के सभी विकास खण्डों में प्रथम चरण पर दस-दस नालों का चयन किया गया है। विभाग के अधिकारी चयनित नालों का सर्वे कर रहें है। नालें के प्रारंभ स्थल से लेकर अंतिम बहाव क्षेत्र तक भ्रमण कर भौलोगिक स्थिति का अध्यनन किया जा रहा है। श्री महेश चंद्र अति. मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कबीरधाम ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य शासन नें प्रदेश में नरूवा, गरूवा, घुरूवा और बाडी योजना के तहत ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को मजबूत करने के लिए समग्र विकास का काम कर रहीं है।

इसी क्रम में नरूवा के तहत सकरी नदी, हरी नाला, कर्रा नाला, नागाझोरी नाला, मझकुंदा नाला, चण्डी नाला, डमगढ़ नाला, दमोह नाला, नर्मदा नदी(नरोदी), बहराखाल नाला उलठ, करूवा नाला, जैसे अनेक स्थलों की पहचान कर सर्वे का काम जारी है।
जिला पंचायत के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री महेश चंद्र ने आगे जानकारी देते हुए बताया की आधुनिक तकनीक के सहायता से पानी रोकने के लिए कार्योजना बनाई जा रही है। ग्लोबल इंर्फामेंशन सिस्टम के द्वारा पूरे क्षेत्र का अध्यनन हो रहा है, इसरो के भुवन ऐप्लीकेशन से क्षेत्र, पंचायत की पहचान तथा क्लॉर्ट मोबाईल ऐप्लीकेशन से पानी रोकने के लिए काम की पहचान की जा रही है। इससे पता चलेगा की उस क्षेत्र में कौन से काम कराना उपयुक्त है। जैसे लूस बोल्डर, ब्रस उड़, गेवियन, तालाब, अडंर डाईक, चेकडेम, अर्दन डेम अथवा गाद निकासी का काम । ज्ञात हो कि ये सभी काम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी येजना, कैम्पा योजना, चैदवें वित्त योजनाओं से मिलाकर अभीशरण के द्वारा किया जाएगा। अभी तक बोडला क्षेत्र के विभिन्न नालों में 106 किमी. का सर्वे हो चुका है। इसी तरह पण्डरिया क्षेत्र में 16 किमी, कवर्धा क्षेत्र में 25 किमी एवं स.लोहारा क्षेत्र में 43 किमी का सर्वे किया गया है। इस काम के लिए राजस्व क्षेत्र के साथ वन क्षेत्रों का भी अध्यनन हो रहा है। नरूवा के इस काम से भू-जल स्तर में काफी बढोतरी होगी तथा जल संवर्धन होगा। क्षेत्र के कृषकों के लिए यह काम बहुत लाभदायक होगा क्योंकि उन्हे बारह महिने पानी मिल सकेगा।

Spread the love

You missed