राज्य शासन द्वारा सॉफ्टवेयर के नवीन वर्जन को बनाया गया पारदर्शी कवर्धा, कबीर काांंति भुईयां सॉफ्टवेयर के वर्तमान वर्जन में जोड़े गए नवीन विकल्प छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता एवं भू-अभिलेख नियमावली के प्रविधान के अधीन ही है। खसरा के कॉलम एक से चार जिसके अंतर्गत खसरा नंबर, रकबा, भूस्वामी का नाम, शासकीय पट्टेदार संबंधी प्रविष्टियां हैं, इनमें किसी भी खसरा नंबर से संबंधित डेटा में संशोधन का प्रावधान समाप्त नहीं किया गया है, बल्कि डेटा में संशोधन के पूर्व सक्षम राजस्व अधिकारी की स्वीकृति प्राप्त कर आवश्यक सुधार किया जा सकता है। कबीरधाम भू-अभिलेख के प्रभारी अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर श्री अनिल सिदार ने बताया कि पटवारी अपनी आई.डी. से लुप्त खसरों का संकलन एवं भूस्वामी रहित खसरों में डाटा प्रविष्टि के लिए स्वतंत्र है, इसके लिए सक्षम अधिकारी की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है, साथ ही सॉफ्टवेयर के खसरा मेनू में कैफियत संशोधन विकल्प के द्वारा पूर्व के केफियत को परिवर्तन कर नई कैफियत की प्रविष्टि कर सकते हैं। नामांतरण और बटांकन के लिए अभिलेख दुरूस्ती मेनू में पंजी में प्रविष्टि विकल्प और अभिलेख अद्यतीकरण विकल्प का चयन कर तहसीलदार आदेश क्रमांक डालकर पंजीकरण नंबर से या ऑफलाईन प्रविष्टि, पटवारी अपनी आई.डी. से कर सकते है, बंदोबस्त त्रुटि सुधार विकल्प में दो खसरों के रकबों में आवश्यकतानुसार परिवर्तन का विकल्प है, जिसमें दशमलव के चार स्थान तक प्रविष्टि की जा सकती है। उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा इस प्रकार सॉफ्टवेयर के नवीन वर्जन को पारदर्शी बनाया गया है। तहसीलदार के संज्ञान के बिना जो सुधार कर दिया जाता था, जिससे बाद में कृषकों को जो परेशानी का सामना करना पड़ता था, उस पर नियंत्रण का प्रयास राज्य सरकार द्वारा किया गया है। साथ ही नामांतरण (अभिलेख दुरूस्ती मेनू) में पहले जो केवल क्रेता एवं विक्रेता का विकल्प होता था, अब वर्तमान भूमिस्वामी की जानकारी (विक्रेता) और प्रस्तारित भूमिस्वामी की जानकारी (क्रेता) का विकल्प प्रदान किया गया है, जिससे किसानों एवं आम जनता को राहत मिलेगी, जिन छोटी-छोटी त्रुटियों को सुधार पाने में असमर्थता कहकर विरोध किया जा रहा है, वह छोटी त्रुटि नहीं है क्यों कि किसान के नाम में परिवर्तन से किसान को परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब नाम परिर्वतन को तहसीलदार के अनुमति के बाद ऑनलाईन किया जा सकेगा, जो कि भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के अनुरूप ही है। इस प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी और यह खसरो के दुरूपयोग को रोकने का राज्य सरकार का एक प्रयास है। एक और दो मई को अधीक्षक एवं सहायक अधीक्षक भू-अभिलेख हेतु कार्यशाला, छह मई को डाटा एन्ट्री ऑपरेटर का एवं सात मई को नायब तहसीदारों को रायपुर में भुईया सॉफ्टवेयर की ट्रेनिंग प्रदान की जा चुंकी है। सभी तहसीलों से प्राप्त जानकारी के अनुसार आने वाले एक सप्ताह में नायब तहसीलदारों के माध्यम से पटवारियों को भुईयां सॉफ्टवेयर संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा एवं पटवारियों की समस्याओं का समाधान किया जायेगा ताकि वे सॉफ्टवेयर की तकनीकी समस्याओं को समझ सकें। Spread the love Post navigation पर्यावरण संरक्षण समिति के अपील को मिल रहा समर्थन, विभिन्न अवसरों में प्रति दिन लग है औसतन दो पौधे। योगी आदित्यनाथ ने सपा-बसपा गठबंधन पर साधा निशाना, कहा – “मैंने सुना था कि हाथी बच्चा देता है, लेकिन आप लोगों की कृपा से यहां पर हाथी ने तो अंडा दिया है”